कृषि और बागवानी

कृषि और बागवानी

कृषि और बागवानी 

हिमाचल प्रदेश का 11% क्षेत्र कृषि योग्य है। हिमाचल प्रदेश के 68% लोगों को कृषि अप्रत्यक्ष हूप ले रोजगार उपलब्ध करवाती है। हिमाचल प्रदेश की 21% भूमि पर खेती की जाती है। हर किसान के पास औसतन 1.21 हेक्टेयर भूमि है। मण्डी जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में कृषि होती है। यहाँ 46% भाग में खेती की जाती है। लाहौल-स्पीति जिले में न्यूनतम क्षेत्र में कृषि होती है। यहाँ 0.2% भाग में खेती की जाती है। हिमाचल प्रदेश के फसल उत्पादन का 91% भाग खाद्यान्न है और 7% भाग सब्जियां व मसाले हैं। 91% खाद्यान्न में से 85% धान्य फसले तथा 6% दलहन फसलें हैं। गेहूँ-गेहूँ का सर्वाधिक उत्पादन कांगड़ा जिले में होता है। गेहूँ रबी की फसल है। आर, आर.-21, कल्याण सोना, सोनालिका गेहूँ की उत्तम किसमें हैं। हिमाचल प्रदेश में मक्का के बाद गेहूँ का सर्वाधिक उत्पादन होता है। मकक्‍्का-मक्का खरीफ की फसल है। 

हिमाचल प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र के 26% भाग में मक्का का उत्पादन होता है। यह हिमाचल प्रदेश की मुख्य खाद्य फसलों में से एक है।

 हिमाचल प्रदेश का मक्का उत्पादन में भारत में 5वां स्थान है। हिम-123, गंगा-3, विजय और अम्बर मक्का की उत्तम किसमें हैं। 

धान-धान खरीफ की फसल है। हिमाचल प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र के 10% भाग में धान की खेती की जाती है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में धान का सर्वाधिक उत्पादन होता है। 

जौ-जौ का अधिकतर उत्पादन शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्‍्नौर जिले में होता है। हिमाचल के कृषि उत्पादन में जौ की भागीदारी 5% है। अनाज–ज्वार, बाजरा, रागी जैसे छोटे अनाजों का सर्वाधिक उत्पादन किन्‍नौर जिले में होता 

है। किन्‍नौर के कृपि मूमि के 54% भाग में अनाजों का उत्पादन होता है। 

आलू-हिमाचल प्रदेश को ‘होम ऑफ सीड पोटैटो” कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश का आलू के उत्पादन में भारत में 10वां स्थान है। शिमला जिले में आलू का सर्वाधिक उत्पादन होता है; जबकि हमीरपुर जिले में आलू का सबसे कम उत्पादन होता है। 

1987 में लाहौल घाटी में 46,979 किग्रा.हेक्टेयर आलू का उत्पादन हुआ, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड हॉलैण्ड के नाम था, जहां 37,772 किग्रा.हेक्टेयर आलू का उत्पादन हआ। कफरी चन्द्रमुखी, 

कुफरी अलंकार, कुफरी जीवन, कुफरी ज्योति, गिरीराज, अशोका, पुखराज, जवाहर, ज्योति, सिंदरी, बादशाह, अटलांटिक, गुलमर्ग आलू की मुख्य किसमें हैं। शिमला स्थित केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सी.पी.आर.आई.) को 1956 ई. में पटना से शिमला (कुफरी) में स्थानांतरित किया गया और 1966 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्‌ के अधीन लाया गया। 

अदरक-हिमाचल प्रदेश का अदरक उत्पादन में देश भर में केरल के बाद दूसरा स्थान है। सिरमौर जिले में सर्वाधिक अदरक का उत्पादन होता है। 

सब्जियाँ-लिंकन बून विला मटर की एक किस्म है। चुकंदर का बीज केवल किन्नौर में पैदा किया जाता है। सोलन को खुम्भ शहर के नाम से जाना जाता है। सोलन में मशरूम अनुसंधान केन्द्र है। 

काला जीरा सिर्फ किन्‍नौर व लाहौल-स्पीति में पैदा किया जाता है। परवाणू में फल प्रोसेसिंग केन्द्र है। सोलन जिले में सबसे अधिक टमाटर का उत्पादन होता है। 

तिलहन-1987 ई. में लाहौल घाटी में 1600 किग्रा.शहेक्टेयर तिलहन उत्पादन हुआ, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है। 

बागवानी-हिमाचल प्रदेश को भारत का “सेब राज्य” कहते हैं। देश के 35% सेब का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में होता है। 

सेब-हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सर्वाधिक सेब का उत्पादन होता है। शिमला और कुल्लू जिले 80% सेब का उत्पादन करते हैं। अलेक्जेण्डर कोल्ट ने 1887 ई. में शिमला के मशोबरा में सेब के बाग लगवाए। परंतु वास्तव में सेब की खेती 1918 ई. में प्रारंभ हुई, जब सैमुअल इवान्स स्टोक्स ने अमेरिकी किस्म के सेब कोटगढ़ में लगवाए। आर.सी.ली. 1870 ई. में हिमाचल प्रदेश में ब्रिटिश किस्म के सेब लाए। सेब की प्रमुख किसमें हैं-जीनाथन रेड डिलिशियस, रोम ब्यूटी आरली शानवरी, ब्यूटी ऑफ बाघ शिमला किस्म के सेब हैं; जवकि गोल्डन डिलिशियस बेन डेविस, बाल्डविन कुल्लू घाटी की किस्म के सेब हैं। इस समय हिमाचल के 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन किया जाता है। 

कुठ-क॒ठ की खेती मुख्यतः लाहौल-स्पीति में की जाती है। इसका उत्पादन 1925 ई. में शुरू हुआ। देश का प्रथम फल संग्रहालय मण्डी जिले के सरोल में स्थित है। इसकी स्थापना 21 मई, 1996 को की गई थी। ु 

किवी-किवी का उत्पादन 1969 ई. में शिमला में शुरू हुआ। इसे चीनी गुजबैरी के नाम से भी जाना जाता है। यह हिमाचल का एक भावी फल है। 

केसर-केसर का उत्पादन लाहौल-स्पीति जिले में होता है। 

चाय-हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक चाय का उत्पादन कांगड़ा जिले में होता है। कांगड़ा जिले में चाय का उत्पादन 1850 ई. में शुरू हुआ, जिसे हैल्टा टी एस्टेट ने शुरू किया। कांगड़ा चाय ग्रीन गोल्ड के नाम से बिकती है। परवाणू में फल विधायन केन्द्र है। चाय की खेती 2300 हेक्टेयर में होती है। 

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