हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं?

हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं? क्या बिना औषधि के भी शरीर स्वस्थ रह सकता है? क्‍या हम कभी भी रोगग्रस्त नहीं होगे ? योगीराज स्वामी गौरीश्वरानन्द पुरी जी महाराज के पास इन सब प्रश्नों का उतर हां में है।

 स्वामी जी का कहना है कि योग प्रशिक्षण सत्र तथा पत्रकार सम्मेलनों के दौरान अक्सर उनसे इस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं और वे इन सब प्रश्नों का जवाब हां’ में ही देते है ।

 स्वामी गौरीश्वरानन्द पुरी जी का कहना है कि हम बिना औषधि के रोगमुक्त होकर सुखी जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

स्वामी जी के अनुसार यदि हम नियमित नियम – निष्ठा के साथ आसन – प्राणायाम करते हैं तो कभी भी रोगग्रस्त नहीं होगें और जब शरीर में रोग ही नहीं होगा तो औषधि की आवश्यकता ही नहीं पडेंगी । 

शरीर रोगग्रस्त क्यों व कब होता है ?

जब हम जन्म लेते है उस समय रोगमुक्त होकर ही सात गर्म में आते हैं, परन्तु मांका शरीर रोगमुक्त नहीं है तो हम भी रोगी बनना शुरू हो जाते हैं | रोग की उत्पति का मुख्य एवं मूल कारण हमारी लापरवाही, असंतौष एवं इन्द्रिय संयम का अभाव है | अगर हम पांच चीजों पर नियन्त्रण करें तो बिना 

औषधि तथा बिना आसन -प्राणायाम से निरामय दीर्घायु उपभोग कर सकते हैं | यह मेरी आज 60-62 वर्ष की अभिज्ञाता व अनुभव है | यह पांच चीजें है –खाना, पीना, सोना, बैठना व बोलना-भारदेन्दु, शिमला।

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 स्वस्थ रहने के लिए क्या खाना चाहिए?

उम्र, जलवायु, समय तथा खाद्य वस्तु की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए खाद्याखाद्य निरूपण करना चाहिए। 

15 वर्ष तक के बालकों और बालिकाओं को कभी भी गरिष्ठ भोजन नहीं देना चाहिए । जैसे : घी, तली हुई चीजें, बर्फी, काजू, पिस्ता, अखरोट, गुरूपाक भोजन, खीर, मैदे से बनी चीज़ें व परांठे आदि | 

16 से 30 वर्ष तक के युवकों व युवतियों के लिए निषिद्ध खाद्य द्रव्य के अलावा कोई परहेज नहीं । 

30 से 50 तक समय पर परिमाण से खाएं |

 50 वर्ष के बाद 24 घण्टे में दिन में 12-1 बजे संतुलित भोजन लें । सुबह-शाम लघु अपने सामर्थ अनुसार करें | दो बार भोजन नहीं । 

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आहार हम कब-कब लें : 

दिन का मुख्य भोजन 11 से 1 बजे के बीच हो । प्रात: कालीन लघु आहार 8 बजे एवं नैश आहार भी रात्री 8 बजे हो जाना चाहिए । दिन में भोजन से पहले हरी सब्जी जैसे मूली, पत्तागोभी, गाजर चुकन्दर, टमाटर, खीरा आदि परिमाण से लेना आवश्यक है।

इससे ताज़ा विटामिन मिलता है।

साथ दी साथ भोजन जल्‍दी पच जाता है । दिन में 3 बजे साध्यानुसार ऋतुजाए ‘कुछ भी फल लेना चाहिए। 

दिन में 3 बजे के बाद सूर्योदय तक इन चीजों को कभी भी नहीं लेना चाहिए । चावल, दही, पका केला, खीरा, पक्का पपीता, अमरूद, मूली, शाक, दाल व करेला । दिन के भोजन में चावल या रोटी, दाल, पर्याप्त सब्जी, सलाद, दही, खीर तथा मिष्ठान्न।

भोजन से पहले कदापि मिठाई न लें । 

‘मधुरेण समापयेत्‌’ मिठाई के द्वारा भोजन खत्म हो जाना चाहिए । 

खाद्य द्रव्य को अति उत्तम रूप से चबा-चबा कर चाएं | कहावत है कि ‘खाने को पीयो और पानी को खाओ” |

 कितना भोजन लेना चाहीए?

  पाकस्थली का एक चौथाई हिस्सा हर समय खाली रहना चाहिए, हवा चलाचल के लिए, एक चौथाई हिस्सा भोजन के एक घण्टा पूर्व आधा लीटर पानी से भरना, बाकि दो हिस्से भोजन से. भरना । अक्षुधा या अल्पक्षुधा में भोजन नहीं करना चाहिए । शास्त्र कह रहे हैं :

_“अजीर्ण भोजनं विषम्‌” भोजन न पचने की स्थिति में भोजन करते है तो वह शुद्ध भोजन भी विष बन जाता है | सप्ताह में एक दिन केवल पानी पी कर रहिए अथवा हर एकादशी में हल्का फलाहार लें एवं हर चतुर्दशी में रात का भोजन छोड़ दें

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