खाद्यगीति और शिशुपालन विधि।

खाद्यगीति और शिशुपालन विधि।

बच्धपि भोजन के सिद्धान्तों के विषय में आयुर्धेदिक एवं यौगिक मतानुसार यथास्थान हमने संक्षेप में खर्सा की है फिर भी सर्वसाधारण को इस संबंध में पूरी जानकारी हो–भारत के प्राचीन सिद्धान्त एवं आधुनिक पाश्चात्य सिद्धान्तों में क्या-क्या स्तमता-विषमताएँ हैं यह बताने के लिए हम इस अध्याय में बिस्तृत विवेचन कर रहे हैं। यहाँ हम आधुनिक एवं प्राचीन दोनों सिद्धान्तों का तुलनात्मक विश्लेषण करेंगे। साथ ही हम यह भी सलाह देंगे कि सर्व-साधारण को भोजन के विषय में किस प्रकार का मार्ग अपनाना थाहिए ताकि उनके स्वास्थ्य का हित हो। 

योग का मत है कि वायु ही जीवन है। पृथ्वी, जल एबं ताप वायु से ही उत्पन्न हुए हैं। इस प्रकार लाखों ही सौर जगत इस जीवन के तत्व–वायु से नाना प्रकार की आकृतियों में उत्पन्न होते हैं। हमारे शरीर की उत्पत्ति भी वायु से ही हैं। थषायुः पंचथा अ्रविभर्क्त देह धारयति अर्थात्‌ वायु पौँच विभिन्न प्रकार के रूपों में विभक्त होकर शरीर को बनाती है एवं उसका संचालन करती है। पौंच प्रकार की वायु है–प्राण, अपान, समान, उदान एवं व्यान। 

भोजन

एक आवश्यकता ६ हमारे रोमकू्पों से हम जिस हवा का सेवन करते हैं या श्वास-प्रश्वास ग्रहण करते हैं उससे ही हमारे शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती है। इस प्रकार से गृहीत वायु को पूर्ण रूप से हम उपयोग भी नहीं कर पाते हैं। आधुनिक अन्वेषणों से यह पता चला है कि शरीर सिर्फ १/३ भाग हवा का ही उपयोग कर पाता है। इस प्रकार से बची हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमें भोजन की आवश्यकता होती है। जितने भी खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं वे सभी पांच प्रकार की वायु से निर्मित हैं। इन्हीं खाद्य पदार्थों से इन पौंचों प्रकार की वायु को ग्रहण कर हम अपने शरीर के निर्माण में इसका उपयोग करते हैं। खाद्य पदार्थ में स्थित वायु को हम सहज ही पचा सकते हैं और यही कारण है कि शरीर के विकास एवं स्वास्थ्य के लिए भोजन आवश्यक है। शरीर के कार्य-कलापों के फलस्वरूप हम प्रत्येक क्षण कुछ न कुछ अंश खोते रहते हैं। इस क्षति की पूर्ति भोजन से की जाती है ताकि शरीर सदैव सक्रिय बना रहे। 

हमारा मत यह है कि जब तक भोजन के सिद्धान्तों को हम भली प्रकार नहीं समझ लेंगे हमारा शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास भली प्रकार नहीं हो सकेगा। भारतीय इृष्टिकोण के अनुसार भोजन दो प्रकार का है : (१) निरामिष एवं (२) आमिष। 

थोग से रोग निवारण 

पाक्षात्य मतानुसार भी भोजन दो प्रकार का है ; (१) शाकादिक आहार (२) माशादिक आहार। पूर्वी एवं पाध्षात्य मत के आधार पर मासाहारी खाद्य पदार्थों में सिर्फ एप के विषय में मतभेद है। पाक्षात्य मत दूध को भी मांसाहारी हृथ्ष समझता है, अबकि, पूवी प्रत के अनुसार दूध शाकाहारी दइच्प है। इस पुस्तक में हमने जहां कहीं भी माशाहारी दृष्यों का उल्लेख किया है उनमें दूध सम्मिलित नहीं है। 

भारतीय मत के अनुसार प्राणवाथु जीवन का आहार है। प्राणवायु के बिना जीवन निराधार है। सभी शाकाहारी द्ू्यों में चूँकि प्राणवायु अर्धात्‌ जीवन का समानेश है अतरक हमारा एवं ‘प्राणी मात्र का भोजन’ कह सकते हैं। भारतीय मत के अनुसार भोजन के दो भाग हैं जैसे-मांसाहारी द्रव्य एवं शाकाहारी द्ब्य अधिक उपयुक्त हैं। चूंकि शाकाहारी द्रव्य एवं दूध की पाचन क्रिया एक ही प्रकार की है अतएव दूध को शाकाहारी ह्रय्प समूह में सम्मिलित करना अधिक सार्थक है। 

पृथ्वी पर सर्वप्रथम जीवन का संचार बनस्पति में हुआ। पृथ्वी, जल एवं पत्थरों मे छिपी शक्ति ही घनीभूत होकर पौधों के रूप में प्रकट हुई। इस प्रकार पृथ्वी की प्रधम सजीव उत्पत्ति है पौधे एवं 105६ आदि। जल, वायु एवं प्रकाश से भोजन ग्रहण करने की शक्ति केवल पौधों में ही हैं। वे इन तत्यों से जीवनीय द्रव्य जैसे विटामिन आदि को उत्पत्ति करते हैं। हमारे भोजन का मुख्य अंश हम वनस्पति जगत से प्राप्त करते हैं। सिर्फ मनुष्य ही नहीं सभी प्राणियों के भोजन का प्लोत बही है। मांसभोजी जानवर भी शाकाहारी जानवरों को ही अपना भोजन बनाते हैं। इस प्रकार थे भी अप्रत्यक्ष रूप से बनस्पति जगत पर ही अश्रित हैं। इस प्रकार यह सिद्ध हो जाता है कि अनस्पतियौं ही जीवन का स्रोत हैं वे ही एक मात्र ऐसे खाद्यपदार्थ हैं जो शरीर के निर्माण एवं विकास में सफल योगदान कर सकती हैं। 

पाश्चात्य आधुनिक अन्वेषकों ने भी वायु को जीवन का मूल तत्य स्वीकार किया है। उनके मत के अनुसार शरीर ४ प्रकार की वायु एवं १४ प्रकार के खनिज पदार्थों से बना हुआ है। इस प्रकार ये खनिज पदार्थ भी शरीर के लिये आवश्यक द्रव्य हैं। ये खनिज पदार्थ भी वायु के ही रूप हैं। आधुनिक रसायनशास्त्री इन्हीं पदार्थों से ४ प्रकार की गैस (वायु) तैयार कर सकते हैं। इन गैस पदार्थों के विभिन्न नाम हैं ताकि इनके गुणों का भेद भली प्रकार समझा जा सके। भारत के प्राचीन क्रषियों ने इन खनिज पदार्थों का पृथक्‌ उल्लेख करके शरीर को पंचवायु पर ही आधारित बताया है; क्योंकि खनिज द्व्य भी वायु के ही प्रतिरूप हैं। सभी हमारे मत को भली प्रकार समझें–इस उद्देश्य से भोजन के सिद्धान्तों का विवेचन हम पाश्चात्य मत के अनुसार ही कर रहे हैं। 

मनुष्य के शरीर के निर्माण के लिये आवश्यक हैं ये ४ गैस पदार्थ–ऑक्सीजन, कार्बन, हाईड्रोजन एवं नाइट्रोजन। १४ प्रकार के खनिज पदार्थों के नाम हैं–कैल्सिपम, फॉसफोरस, लौह, ओऑंयोडिन, पोटेशियम, सोडियम, मैन्नेशियम, तौबा, गन्धक, फ्लतोरिन, कलोलि, पैंगगीज, सिलिकन एवं कोबाल्ट | इनके अंश शरीर में नीचे लिखे अनुसार अगस्थिए 

ऑक्सीजन-६२%; कार्बन–२१%; हाइड्रोजन—९% 

नाइट्रोजन-–३९१; फैलशियम—२% फॉसफोरस–१%; अन्य १२ प्रकार के लवण २१%। 

ऑक्सीजन-

-हम वायुरूपी समुद्र की गहराई में अवस्थित हैं जिसका २१% भाग ऑक्सीजन है। लेकिन हम सिर्फ ४% अंश का ही अपने श्वास-प्रश्वास में उपयोग कर पधकते हैं। अवशेष १७% भाग हमें श्वास के जरिये बाहर निकाल देना होता है। हमारे शरीरिक स्वास्थ्य के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है। पहले ही बताया जा चुका है कि शरीर का ६२% भाग ऑक्सीजन से बना हुआ है। जिस प्रकार तैल के अभाव में दीपक बुप जाता है उसी प्रकार शरीर भी ऑक्सीजन के अभाव में मर जाता है। बन्द कमरें में जहाँ लालटेन जलती हो अगर कोई आदमी सो जाय तो वह मर जाता है; क्योंकि लालटेन ऑक्सीजन को समाप्त कर देती है। पेट की क्षुधाम्रि को प्रज्वलित रखने और शरीर के ताप को स्थायी रखने के लिये ऑक्सीजन शरीर में जलती रहती है, शरीर का निर्माण करती है एवं इसे सक्रिय रखती है। 

ऑक्सीजनयुक्त खाद्य पदार्थ-

-सभी प्रकार के भोजनों में ऑक्सीजन विद्यमान है। लेकिन फलों के रस तथा शाक-सब्जी में ऑक्सीजन का भाग काफी अधिक मौजूद रहने के कारण इनका नाम ही ऑक्सीजनीय खाद्य पदार्थ है। खाद्य पदार्थों के कैलोरिक स्तरीय मूल्य की जानकारी की आवश्यकता नहीं हैं। तथ्य यह है कि इन खाद्य पदार्थों में जीवन शक्ति भरपूर है और शरीर के लिये आवश्यक ऑक्सीजन का श्लोत यही है। 

कार्बन-अन्य वायु आदि के संयोग से कार्बन शरीर को शक्ति प्रदान करता है, शरीर के तापमान को स्थायित्व प्रदान करता है और शरीर के विकास में सहायता करता है। लेकिन इसकी शरीर में अधिकता होने के फलस्वरूप रोगी होकर शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त करता है। कार्बन एवं ऑक्सीजन की शरीर को समानरूप से आवश्यकता है। शरीर में ऑक्सीजन के जल जाने के फलस्वरूप कार्बन का उत्पादन होता है। लेकिन पेड़-पौधों में कार्बन ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। पेड़-पौधों आदि एवं मनुष्य एक दूसरे के पूरक हैं; मनुष्य की असावधानी के फलस्वरूप अगर वनस्पति-जगत में कार्बन की अधिकता हो जायेगी, जिसके फलस्वरूप वायुमंडल में भयंकर गर्मी पैदा होगी जो मनुष्य के लिये हानिकारक होगी। इसीलिये पेड़ एवं पौधों को मनुष्य की रक्षा करनी चाहिए ताकि उसे स्वयं का हित हो सके। पेड़ की लकड़ी जलावन के लिये उत्कृष्ट पदार्थ है। पेड़-पौधों के पत्ते एवं हही शाक-सब्जी उत्तम खाद्य पदार्थ है। इस प्रकार यह सिद्ध हो जाता है कि वनस्पति-जगत मनुष्य के उपयोग के लिये ही बना है। इसका संरक्षण मनुष्य का कर्तव्य है। 

कार्बनयुक्त खाद्य पदार्थ–मक्खन, घी, चावल, गेहूँ, आलू, केला आदि चर्बी जातीय खाद्य पदार्थों में कार्बन की मात्रा प्रचुर है। शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये एवं शरीर को स्फूर्ति प्रदान करने के लिये कार्बन अति आवश्यक खाद्य पदार्थ है। 

ऑक्सीजन-६२%; कार्बन–२१%; हाइड्रोजन—९% 

नाइट्रोजन—३९१; फैलशियम—२% फॉसफोरस–१%; अन्य १२ प्रकार के लवण २१%। 

ऑक्सीजन

-हम वायुरूपी समुद्र की गहराई में अवस्थित हैं जिसका २१% भाग ऑक्सीजन है। लेकिन हम सिर्फ ४% अंश का ही अपने श्वास-प्रश्वास में उपयोग कर पधकते हैं। अवशेष १७% भाग हमें श्वास के जरिये बाहर निकाल देना होता है। हमारे शरीरिक स्वास्थ्य के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है। पहले ही बताया जा चुका है कि शरीर का ६२% भाग ऑक्सीजन से बना हुआ है। जिस प्रकार तैल के अभाव में दीपक बुप जाता है उसी प्रकार शरीर भी ऑक्सीजन के अभाव में मर जाता है। बन्द कमरें में जहाँ लालटेन जलती हो अगर कोई आदमी सो जाय तो वह मर जाता है; क्योंकि लालटेन ऑक्सीजन को समाप्त कर देती है। पेट की क्षुधाम्रि को प्रज्वलित रखने और शरीर के ताप को स्थायी रखने के लिये ऑक्सीजन शरीर में जलती रहती है, शरीर का निर्माण करती है एवं इसे सक्रिय रखती है। 

ऑक्‍्सीजनयुक्त खाद्य पदार्थ–

सभी प्रकार के भोजनों में ऑक्सीजन विद्यमान है। लेकिन फलों के रस तथा शाक-सब्जी में ऑक्सीजन का भाग काफी अधिक मौजूद रहने के कारण इनका नाम ही ऑक्सीजनीय खाद्य पदार्थ है। खाद्य पदार्थों के कैलोरिक स्तरीय मूल्य की जानकारी की आवश्यकता नहीं हैं। तथ्य यह है कि इन खाद्य पदार्थों में जीवन शक्ति भरपूर है और शरीर के लिये आवश्यक ऑक्सीजन का श्लोत यही है। 

कार्बन-अन्य वायु आदि के संयोग से कार्बन शरीर को शक्ति प्रदान करता है, शरीर के तापमान को स्थायित्व प्रदान करता है और शरीर के विकास में सहायता करता है। लेकिन इसकी शरीर में अधिकता होने के फलस्वरूप रोगी होकर शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त करता है। कार्बन एवं ऑक्सीजन की शरीर को समानरूप से आवश्यकता है। शरीर में ऑक्सीजन के जल जाने के फलस्वरूप कार्बन का उत्पादन होता है। लेकिन पेड़-पौधों में कार्बन ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। पेड़-पौधों आदि एवं मनुष्य एक दूसरे के पूरक हैं; मनुष्य की असावधानी के फलस्वरूप अगर वनस्पति-जगत में कार्बन की अधिकता हो जायेगी, जिसके फलस्वरूप वायुमंडल में भयंकर गर्मी पैदा होगी जो मनुष्य के लिये हानिकारक होगी। इसीलिये पेड़ एवं पौधों को मनुष्य की रक्षा करनी चाहिए ताकि उसे स्वयं का हित हो सके। पेड़ की लकड़ी जलावन के लिये उत्कृष्ट पदार्थ है। पेड़-पौधों के पत्ते एवं हही शाक-सब्जी उत्तम खाद्य पदार्थ है। इस प्रकार यह सिद्ध हो जाता है कि वनस्पति-जगत मनुष्य के उपयोग के लिये ही बना है। इसका संरक्षण मनुष्य का कर्तव्य है। 

कार्बनयुक्त खाद्य पदार्थ–

मक्खन, घी, चावल, गेहूँ, आलू, केला आदि चर्बी जातीय खाद्य पदार्थों में कार्बन की मात्रा प्रचुर है। शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये एवं शरीर को स्फूर्ति प्रदान करने के लिये कार्बन अति आवश्यक खाद्य पदार्थ है। 

हाइड्रोजन–जल में २/३ भाग हाइड्रोजन है। सभी तरल पदार्थों में हाइड्रोजन काफी मात्रा में अवस्थित है। रक्त, शुक्र एवं अन्य ग्रन्थियों आदि के रस में भी हाइड्रोजन की भात्रा काफी है। इसलिये शरीर की क्रिया एवं उसके पोषण के लिये यह अति आवश्यक है। हाइड्रोजनयुक्त खाद्य पदार्थ-कच्ची शाक-सब्जी एवं रसदार फलों, जल तथा दूध आदि हाइड्रोजनयुक्त खाद्य पदार्थ है। ये सब खाद्य पदार्थ ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन दोनों से परिपूर्ण हैं। नाइट्रोजन–वायुमण्डल का ३/४ भाग नाइट्रोजन है। इसी के फलस्वरूप ऑक्सीजन हल्की बनी रहकर हमारे लिये उपयोगी सिद्ध होती है। अगर नाइट्रोजन की मात्रा में थोड़ी सी भी कमी हो जाय तो प्रम्पू्ण जगत ऑक्सीजन की गर्मी से भस्मसात हो सकता है। अधिक ऑक्सीजन से युक्त वायु को अगर हम श्वास-प्रश्वास के माध्यम से ग्रहण करेंगे तो हमारा शरीर जल जायेगा। इस प्रकार नाइट्रोजज ऑक्सीजन एवं कार्बन की मात्रा को सन्तुलित रखती है। इसके अभाव में ऑक्सीजन का जीवनीय उपयोग असम्भव है। नाइट्रोजन गैस के माध्यम से हमारे शरीर में एकत्रित मल को निकाला जाता है, मांसपेशियों का गठन एवं स्नायुमंडल के निर्माण होने में मदद मिलती है और शरीर का भली भाँति विकास होता है। नाइट्रोजनयुक्त खाद्य पदार्थ-प्रोटीन की प्रचुर मात्रा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मछली, मांस, अंडे, दूध, छेना, दाल तथा मूंगफली आदि नाइट्रोजन युक्त खाद्य पदार्थ हैं। 

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