पशुपालन , वन अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान

पशुपालन

हिमाचल प्रदेश में पशुओं की संख्या 52 लाख के आस-पास है, जिसमें गाय और बैलों की तत्या 25 लाख, भेड़ों की 9 लाख, बकरियों की 11 लाख के आस-पास है। पशुओं की देखभाल के लिए प्रदेश में 306 अस्पताल, 1787 पशु दवाखानें और सीमावर्ती दवाखाने भी हैं। 

भेड़-पालन–इस समय प्रदेश में ज्यूरी (शिमला), ताल (हमीरपुर), कड़छम (किन्नौर), सरोल (चम्बा) में भेड़ प्रजनन केन्द्र खोले गए हैं। हिमाचल प्रदेश में भेड़ों की संख्या 9 लाख के आस-पास है। भेड़ पालन से ऊन आय का प्रमुख स्रोत है। चम्बा जिले में सर्वाधिक ऊन का उत्पादन होता है। यहाँ 375000 हैक्टेयर चरागाह है जो कि प्रदेश में सर्वाधिक है। कन्दवाड़ी (कांगड़ा) व नंगवाई (मण्डी) में अंगोरा खरगोश के फार्म भी खोले गए हैं। हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रफल के 12% भाग में चरागाह हैं। 

मुर्गी पालन-हिमाचल. प्रदेश में मुर्गी पालन के 14 केन्द्र हैं। सर्वाधिक मात्रा में मुर्गियां व अंडों . का उत्पादन कांगड़ा जिले में होता है। इस समय हिमाचल प्रदेश में मुर्गे व मुर्गियों की कुल संख्या 6,64,039 के आस-पास है। पिजेहरा (सोलन) हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा मुर्गी पालन फार्म है। 

गिद्ध प्रजनन केन्द्र-नालागढ़ में स्थापित करने की मंजूरी केन्द्र सरकार ने दी है। 

मछली पालन-हिमाचल प्रदेश का वार्षिक उत्पादन 6880 मीट्रिक टन है। हिमाचल प्रदेश में 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में जलाशय है, जो कि मछली पालन के लिए उपयुक्त है। दयोली (बिलासपुर) में एशिया का सबसे बड़ा मत्स्य-प्रजनन केन्द्र है, जिसकी स्थापना 1961 ई. में की गई थी। प्रदेश में महाशेर, मिरर कोर्ष, लोबियो रोहित ट्राऊट मछली की किसमें पाई जाती हैं। जगतखाना (नालागढ़), आलसू (मण्डी) तथा मिलवा (कांगड़ा) में मत्स्य प्रजनन केन्द्र खोले गए हैं। 

मधुमक्खी पालन-हिमाचल प्रदेश में 1500 टन शहद का वार्षिक उत्पादन करने की क्षमता है। हिमाचल प्रदेश में 1954 ई. में चम्बा के सरोल में मधुमक्खी पालन केन्द्र खोला गया। 

पशु-गाय और बैलों के लिए कोठीपुर (बिलासपुर), कमाण्ड (मण्डी), पालमपुर में प्रजनन केन्द्र है। हिमाचल प्रदेश में 873 हजार टन दूध का उत्पादन 2007 में हुआ। 

वन अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान 

4, बन-हिमाचल प्रदेश के 37033 वर्ग किमी. क्षेत्र में वन है जो कि प्रदेश के कुल क्षेत्र का 66.5% के लगभग है। वनों से प्रदेश की आय का 25% भाग आता है। 37033 वर्ग किमी. क्षेत्र को बनों के अन्तर्गत लाने का कार्यक्रम 1988 में राष्ट्रीय वन नीति के तहत किया गया। वनों से हमें प्रतिवर्ष 34 लाख घनफुट इमारती लकड़ी प्राप्त होती है। 

महत्वपूर्ण अधिनियम (एक्ट)-« 

(0) 25 मार्च, 1974 को हिमाचल वन निगम की स्थापना की गई। 

(1) हिमाचल प्रदेश वन अधिनियम, 1982. : 

(1) हिमाचल प्रदेश संरक्षण रख-रखाव अधिनियम, 1984 

(४) हिमाचल प्रदेश भूमि संरक्षण अधिनियम, 1978 

चीड़ के वृक्ष से बिरोजा प्राप्त होता है जो तारपीन का तेल, प्लास्टिक की चीजें बनाने के काम आता है। बिलासपुर व नाहन में बिरोजा फैक्ट्रियां हैं। हिमाचल प्रदेश के 24% भाग में चीड़ के वन हैं, तो 27% भाग में कैश और देवदार के वन हैं। सबसे कम वन लाहौल-स्पीति जिले में हैं। 

राज्य-यृक्ष-देवदार राज्य पक्षी-जाजुराना राष्य-पक्ु-बर्फीला तेंदुआ 

4. अभयारण्य व राष्ट्रीय उद्यान-

हिमाचल प्रदेश में 2 राष्ट्रीय उधान (पार्क), 33 वन्य जीव इक्वारण्य, 3 प्राकृतिक पार्क हैं। इसके अन्तर्गत 7029 वर्ग किमी. क्षेत्र आता है, जो कि प्रदेश हे क्षेफल का 12.63% भाग है। सबसे बड़ा वन्य जीव अभयारण्य लाहौल-स्पीति का किव्यर है, जिसका शषेत्रफल 1400 वर्ग किमी. है। सबसे छोटा वन्य जीव अभयारण्य सोलन का शिल्ली है जिसका क्षेत्रफल 2 वर्ग किमी. है। 

कष्ट्रीय पार्क (2)-61) ब्रेट हिमालयन नेशनल पार्क-कुल्लू का यह पार्क 754 वर्ग किमी. में है, जो कि 1 मार्च, 1984 में राष्ट्रीय पार्क बना। 

(1 बिन घाटी नेशनल पार्क-लाहौल-स्पीति का यह पार्क 675 किमी. वर्ग किमी. है, जो हि 9 जनवरी, 1967 में राष्ट्रीय पार्क बना। 

प्राकृतिक भार्क (3)-6) कुफरी, शिमला, (1) मनाली शरणस्थली, (17) गोपालपुर, अभवाणण्य कांगड़ा । ५ 

चिड़ियाघर-टुटीकण्डी, शिमला । 

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