स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या ? जानिए।

स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या

हमारे स्थूल शरीर की रक्षा के लिये तीन चीजों की आवश्यकता है

  1. आहार 
  2. आच्छादन तथा 
  3. आवास।

 श्री कृष्ण जी गीता में कहे हैं, “युक्ताहार विहार” फिर उपनिषद्‌ भी कहे हैं, 

“आहारणुद्धी सत्त्वशुद्धि: सत्त्वशुद्धों धुवास्मृति:। “स्मृतिलाभे सर्वग्रन्थीनां विप्रमोक्ष:।” अर्थात्‌ आहार शुद्धि होने से सत्त्वशुद्धि होती है और सत्त्वशुद्धि होने से निश्चित स्मृतिलाभ होता है । 

स्मृतिलाभ होने से मुक्ति अतीव सुलभ हो जाती है। 

इसलिये हमें हर तरह से प्रयास करना चाहिये कि आहार सत्तिविक, सहज, सरल व सुपाच्य हो।  hindigovt.in

स्वस्थ रहने के नियम।

स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या।

अगर हम उस नियम के अनुसार आहार व पानीय पदार्थ ग्रहण करें तो हम रोगग्रस्त नहीं होगें और ‘जीने के लिये ही खाना इस वाक्य को सार्थक कर पायेंगे । 

खाने से पहले या बाद की कुछ अच्छी आदतें आपकी सेहत को बना सकती है तो कुछ बुरी आदतें बिगाड़ भी सकती हैं। हमारे आयुर्वेदयोगशास्त्र खाने के कुछ स्वास नियम निश्चित कर दिये हैं, जिनका अपना वैज्ञानिक महत्व भी है । तो क्या आप जानते हैं खाने के इस विज्ञान को ? 

फल 

रवाना खाने के तुरंत बाद क्या आपकी भी आदत है फल खाने की । अगर हाँ, तो अपनी इस आदत को बदल दें। आहार विशेषज्ञों का तर्क है कि खाने के तुरंत बाद पेट हवा से भर जाता है । इससे पेट में भोजन दूषित होने की आशंका भी बनी रहती है। 

दरअसल फलों को पचने में केवल 2 घंटे लगते हैं, जबकि भोजन को पचने में 4-12 घंटे का समय लगता है । इसके अलावा कार्बोहाइड्रेटस्‌ को पचाने वाला स्‍्लाइवा एंजाइम एल्काइन के रूप मे काम करता है, जबकि नींबू, संतरा, अनानास जैसे खट्टे फल एसिडिक होते हैं। इन दोनों को साथ खाया जाए तो कार्बोहाइड्रेट या स्टार्च की पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है । इससे कब्ज या अपच की समस्या हो सकती है ।

 फल खाने का सर्वोत्तम समय है भोजन से 2 घंटे पहले या भोजन के 2 घंटे बाद और साथ में भोजन से एक घटे पहले थ भोजन के एक घंटे बाद पानी पीना सेहत के लिए अति लाभदायक है। 

भोजन के तत्काल पहले पानी पीने से जठराग्नि शांत हो जाती है ओर गेस, एसिडिटी आदि पैदा होती है। भोजन के हुरंत बाद पानी पीना जहर का काम करता है। शास्त्र प्रमाण दे रहे हैं, “‘भोजनान्ते जल विषम्‌” अर्थात्‌ भोजन के अन्त में जल विष का काम करता है । 

सलाद

भोजन से तत्काल पहले सलाद अति उत्तम रूप से चबा-चबाकर लेना शास्त्र सम्मत है, उससे हमारी पाचन नाली में पाचन रस तेज से निकलना शुरु हो जाता है एवं भोज्यद्रव्य आराम से पच जाता है । इसलिये भोजन से पहले पर्याप्त सलाद लेना चाहिये । 

चाय 

क्या आप जानते हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद चाय की चुस्की मजा नहीं सजा देती है। चाय की पत्तियों में एसिड की काफी मात्रा पाई जाती हे। 

अगर आप खाने के सुरंत बाद चाय ले रहे हैं, तो इससे आहार में शामिल प्रोटीन को नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण रवाना पचाने में परेशानी होती है। अगर चाय लेनी ही हे तो खाना खाने के एक घंटे बाद । 

जहाँ तक संभव हो चाय न ही पियें तो अति उत्तम हैं क्योंकि चाय में त्तीन अवगुण होते हैं-केफीन, चीनी तथा उत्ताप.

कैफीन 

एक कप चाय में जो केफीन होती है उसे खत्म करने के लिए 750 ग्राम गाय के शुद्ध दुध की जरूरत पड़ती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से 750 ग्रा० शुद्ध दुध पीता है, उसके लिए एक कप चाय का कोई नुक्सान नहीं है । 

चीनी 

16 से 30 साल की उम्र तक चीनी शरीर के लिए आवश्यक भी है ओर 

हानिकारक भी नहीं है। 30 के बाद चीनी के बारे में सर्तक रहना चाहिए।

उत्ताप 

खाद्य एवं पानीय पदार्थ हमें शरीर के ताप के अनुसार लेना शास्त्रसम्मत है । हमारी पाचन नली में जो छिद्र हैं जिसके माध्यम से भोजन पचाने के लिए पाचन रस निकलता है, गर्म पदार्थ पाचन नली में जाने से वह छिद्र ज्वल जाता है, जिसके फलस्वरूप पाचन रस निकलना बंद हो जाता है तो भोजन को पचाने के लिए कृत्रिम उपाय अपनाना पड़ता है। 

टहलना 

टहलना सेहत के लिए अच्छा है लेकिन ब्रह्ममुहूर्त के समय । खाना खाने के तुरंत बाद सीधे तेज कदमों से टहलना गलत है । तेज चलने से अपच की समस्या हो सकती है, क्योंकि तेज चलने से हमारा पाचन तंत्र रवाने से सारा पोषण सोख नहीं पाता । हाँ खाना खाने के आधे घण्टे बाद टहलने के लिए जा सकते हैं, वह भी रात्रि भोजन के बाद। 

दिन में भोजन के पश्चात्‌ टहलना नहीं चाहिए बल्कि 30 मिनट तक बज़ासन में विश्राम लेना चाहिए, उससे शरीर की थकान भी मिट जाती है व भोजन भी जल्दी पच जाता है । बज़ासन में बैठकर लकड़ी 

या सींग की कंधी करने से बाल भी घने व काले रहते हैं और झड़ते भी नहीं । 

स्मोकिंग (धूम्रपान ) 

वैसे तो स्मोकिंग सेहत के लिए अत्यन्त हानिकारक है , लेकिन खाना खाने के तुरन्त बाद धूम्रपान (बीडी, सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि) इतना हानिकारक है कि एक सिगरेट पूरे 10 सिगरेट पीने के बराबर है । 

यही नहीं खाना खाने के तुरन्त बाद धूम्रपान करने से पाचन प्रक्रिया में भी परेशानी होती है । इससे पेट में गैस व एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है । धूम्रपान हमारे हृदय तंत्र को कमजोर करता है । संसार में जितने प्रकार के रोग है, लगभग 90% रोग पेट में ओर 10% हुदय तंत्र में होते हैं ।

 विद्वान, बुद्धिमान्‌विचक्षण व्यक्ति मादक द्रव्य से स्वयं को दूर रखेंगे ‘

स्नान 

धर के बड़े बुजुर्ग अक्सर आपको खाने के तुरंत बाद नहाने के लिए मना करते होंगे ओर आप उनकी बात को इग्नोर भी करते होंगे । पर यह सच है कि खाने के तुरंत बाद नहीं नहाना चाहिए । इससे हाथों, पैरों और शरीर में खून का प्रवाह बढ़ने लगता हे । जिसकी वजह से पेट के चारों तरफ खून की मात्रा कम हो जाती है, जो आपके पाचन क्रिया को कमजोर बना देता है । 

भोजन एवं आसन के बाद स्नान करना सरूत मना है । कभी विशेष परिस्थिति में करना पड़े तो एक-डेढ़ घण्टा अंतराल बाद कर सकते हैं । भोजन के बाद स्नान करने से हमारे शरीर का उत्ताप कम हो जाता है जोकि भोजन 

पचाने के लिए अनिवार्य होता हे इसलिए भोजन के बाद स्नान करने से रोग भी आ जाता है । आसन के बाद स्नान करने से हम आसनप्राणायाम से जो ऊर्जा 

संचय करते हैं, वह ऊर्जा पूर्ण रूप से खत्म हो जाती है, इसलिए योगाचार्य हमारे योग-शास्त्र में भोजन एवं आसन के बाद स्नान पूर्ण रूप से निषेध किये है । 

सोना 

जो लोग खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाकर सो जाते हैं, उनका रवाना ठीक तरह से नहीं पचता

 इस कारण उन्हें गेस की समस्या पेदा होती है । इससे आतों में इन्फेक्शन की समस्या भी पैदा हो सकती है। खाने के बाद सोने से निश्चित रूप से मेद वृद्धि (मोटापा) होती है । 

सोने का उत्तम समय है रात्रि 10 से 4 बजे तक, एवं 6 घन्टे ही सोना  है । 

अतिनिद्रादिवानिद्रा सख्त मना है। 

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